संदेश

अगस्त, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शायरी#१३

  द यार -ए-नूर देखा तो यक़ी आया। खुदा पर जुर्म ढाने के तरीके बहुत हैं।

शायरी#१२

  जब फोटो में तुम खड़ी नजर आई। नींद आने को थी नहीं आयी।

शायरी#११

  तारीफ़े करने में मुझे गुरेज नही हैं ख्वातीन। बशर्ते मैं उम्मीद पे खरा उतर जाऊं।

शायरी#१०

  द यार -ए-नूर देखा तो यक़ी आया। खुदा पर जुर्म ढाने के तरीके बहुत हैं।

शायरी#९

बाँटना है तो शौक़ से बाँट दो,  दरमियाँ रिश्तों की तान बान को। बस पत्थर सी दीवार न बनाओ,  शीशे सी गुंजाइस रहने दो।

शायरी#८

वो अपना काम कर के निकल गया, थोड़ा सा नाम कर के निकल गया। दो चार बाते मोहब्बत की भी की, फिर हमें बदनाम कर के निकल गया। 

शायरी#७

 सर पर बैठाया जिसके हूनर को भी हमने, वो अपने मकसद का तलबगार निकला।

शायरी#६

मुस्कुराते चेहरे से बेहतर है मेरी नाराज़गी, उनकी तरह मैं दिखावे का शौक़ीन नहीं।