शायरी#४

दोस्त! कैसे समझता मै उसे,
जब सिक्का मैंने पलटा ही नही, (जिंदगी)
मै यहाँ इंतज़ार कर रहा हूँ,
वो वहां इंतजार कर रही है। (म्रत्यु)

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